3/22/2018

मुहावरो के बदलते अर्थ

बच्चो के एग्जाम शुरू हो गए और कुछ बच्चो के लिए हिंदी को समझना जंग जितने जैसा होता है।
ऐसे में मेरे एक पहचान वाले ने फ़ोन करके बोले कल बेटे के हिंदी का एग्जाम है कुछ मुहावरो के अर्थ बात दो।
मेने हां कर दी तो उसने फ़ोन बच्चे को दे दिया और आज के बच्चो को समझाना इतना भी आसान नही आज पता लगा।आप भी मुहावरो का आनंद लीजिये।कुछ मुहावरो में 3 4 मुहावरे ऐसे थे जिनके अर्थ को उसने अपने तरीके से समझ कर मेरे अर्थ को ही बदल दिया।
"चुड़ैल भी एक घर छोड़ती है" :- मेरा उत्तर था कि कुछ लोग बहुत बुरे हो सकते है वो दुसरो के अहित की चिंता नही करते है ओर अपना काम हो बस यही ध्यान रखते है और सिर्फ अपना ओर अपने परिवार का ही सोचते है ।
इस पर बच्चे का रिप्लाई था कि ऐसा कैसे जब वो जान कर या अनजान में किसी का भी अहित करते है तो असर तो उनके परिवार पर भी होगा न।उनके बच्चो को पता चलेगा तो कितना दुख होगा कि हमारे माता पिता ने कितना गलत किया फिर उनका घर कैसे बचेगा।ओर वो उन्ही घरो में तो अहित करेंगे जो उनका विश्वास करते है।🤦🤦🤦

"धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का" :- ये मुहावरा समझने के लिए मुझे धोबी ओर उसकी पत्नियों के झगड़े की पूरी स्टोरी सुनानी पड़ी और उसे इतना अच्छे से समझ मे आया कि एक ही लाइन में समझा गया कि अच्छा वो चुड़ैल जो अपने घर की भी नही हुई और बाकी घरो को छोड़ा भी नही ।तो ना वो घर की ना घाट की🤦🤦🤦
मेने पूछा तुम्हे सब पता था तो मुझसे क्यो पूछ रहे तो बोलै मम्मा ने बोला आप अच्छे से समझा देगी तो में आपका एग्जाम ले रहा था।
समझ मे नही आ रहा मेने जो सीखा वो सही या इस नन्हे गुरु ने सिखाया वो।

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