10/16/2011

ये जो दोस्ती की तलाश है… सपनों सरीखी

सच्ची दोस्ती… इसी की तलाश में मन जिंदगी भर भटकता फिरता है। दिए जलते हैं, फूल खिलते हैं, बड़ी मुश्किल से मगर दुनिया में दोस्त मिलते हैं… आनंद बख्शी ने जब यह गीत लिखा होगा, तो यकीनन उनका मन जमाने में सबसे अच्छे दोस्त की खोज में भटक रहा होगा। वाकई अच्छे और सच्चे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। इसी की तलाश में दोस्ती के नाम पर ठगे जाते हैं हम कभी-कभी। दोस्ती निभाते वक्त कई बार आप हम मुश्किल दौर से गुजरते हैं, डर लगता है कि दोस्ती का दिया वक्त की आंधी में बुझ ना जाए। ऐेसे में विश्वास की ओट काम आती है और दोस्ती की लौ को और तेज कर देती है एक अदद दोस्ती की चाह उम्र भर मन के किसी कोने में दबी रहती है। एक ऐसे शख्स की चाह जिसका अपमान दुनिया के आडम्बर से परे हो। हम सभी यही चाहते हैं कि सच्ची दोस्ती की एक अनुभूति हमें एक बार तो छू ले… कोई ऐसा तो मिले जिसके नाम पर सजदा करते हुए उम्र बीत जाए। उस कोई की तलाश में हम हर वक्त दोस्ती की गलियों में भटकते रहते हैं। दरअसल जिस खुदा ने हमें जीवन की नेमत बख्शी है, उसी ने जानबूझकर रास्तों को हमारे पांवों में उलझा दिया है और हमारे जिस्म में भर दी है चंद सांसे। हम इन सांसो का बोझ ढोते हुए जिंदगी के रास्तों पर दौड़ते जा रहे हैं। इस दौड़ में हमारी अपनी मर्जी, अपना वजूद, अपनी ख्वाहिशें जिंदगी से हमारी खुद की अपेक्षाएं कहां हैं? कभी सोचा है कि ये कैसा जीवन है, जिसे हम अपना मान बैठे हैं। रिश्तों की धूप-छांव में कुछ तो हरियाली ही होगी…..यकीन मानिये बहती जा रही समय की इस नदी में दोस्ती के कुछ दीप तो होंगे ही, आखिर जिंदगी में दोस्ती के कुछ माने तो होने ही चाहिए……यह तलाश न रूकती है, न थकती है, एक खोज, एक तड़प, एक अहसास है कि जिंदगी जो कुछ है उससे कुछ बड़ी हो, जो फूल डाली पर खिल रहा है वह मन के अगम्य विस्तार में खिले। आसमां के रंग दिल में उतर आए… हर अदना से अदना इंसान जिस तलाश में भटकता है, वह कही ना कही एक सच्चे दोस्त की तलाश है। उसके रूप भिन्न हो सकते हैं पर यह जज्बा हर मन में बसा है। वक्त के साथ इस रिश्ते की सुगंध से जीवन भी सुगंधित हो जाता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात तो यह है कि दोस्त जिंदगी में नहीं मिलते बल्कि जिंदगी ही दोस्तों में मिला करती है।
दोस्ती कहो तो एक लफ्ज, मानो तो बंदगी सोचो तो गहरा सागर और डूबो तो जिंदगी।
वक्त बदल जाता है, लोग बदल जाते हैं, लेकिन दोस्ती का जज्बा हमेशा कायम रहता है। रिश्ता भले ही खून का ना हो, लेकिन इसका रंग तो खून के रिश्ते से भी गहरा है। अपने भीतर समूची कायनात को समेटे हुए। यह दोस्ती ही है जिसके वजह से जिंदगी उन उचाईयों को छूती नजर आती है, जहां पहुंचने की ख्वाहिश हर दिल करता है। इसकी परतों में जिंदगी की अनगिनत सच्चाइयां लिपटी हुई है। यह जिंदगी के विरानों में खिला एक फूल है, जिसकी खुशबू से ब्रम्हांड महकता है। इतना सुंदर तो संसार पहले कभी लगा ही नहीं था। सोचा ही नहंीं था कि जिंदगी इतनी खूबसूरत भी हो सकती है। जब किसी को सच्ची दोस्ती नसीब होती है तो उसका एहसास ही निराला होता है, ऐसा लगता है मानो हर रोज दोस्ती के गहराते रंग जिंदगी के रंगों से रू-ब-रू करवाते हैं। दोस्तों की बदौलत ही लगा जैसे जिंदगी जीने को दिल किया। कहीं से कोई आवाज आई शायद। किसी ने मुंह से कुछ भी नहीं कहा फिर भी पूरी दुनिया ने सुना इकरारे-दोस्ती। इस रिश्ते को जीकर यू लगने लगता है जैसे अब तक जिसे हम जिंदगी समझते रहे वो तो असल में जिंदगी थी ही नहीं। जिसके पीछे अनजाने में चल पड़े थे कदम वो तो बस छलावा मात्र था। और चंद कदमों के साथ ही वो भी दूर हो गया। चाहे आपके साथ हो ही लेते हैं आपके दोस्त। बिना आपसे पूछे आपकी जिंदगी का हिस्सा बन बैठते हैं। हमारी शख्सियत हमसे ही अनजाानी हो जाती है। बस शर्त इतनी सी की दोस्ती सच्ची हो। अगर सच्ची दोस्ती की एक बूंद ने भी कभी दामन में पनाह ली तो सारी उम्र उस एक बूंद की नमी से भीगे-भीगे ही गुजर जाएगी फिर न शिकवा रहेगा, न किसी से कोई शिकायत। यह दुनिया केवल दोस्ती के नाम से और उसके ख्याल से रोशन हो उठेगी। उसके बाद किसी तलाश की कोई गुंजाईश ही नहीं बचेगी, सचमुच नहीं। और अगर ऐसा कोई शख्स आपकी जिंदगी में है, तो उसे गले लगाना और कहना कि-यार तूं बड़ा सोणा है,
हमेशा मेरे साथ रहना….

ज्योति समोता, नाथद्वारा
ज्योति समोता, नाथद्वारा

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