माँ मैं वैष्णो देवी जा रहा हूं तुम भी चलोगी बेटा वृद्ध अवस्था में अगर दर्शन हो जाएँ तो अच्छा है, कल का क्या पता कल चलेंगे - दो चार दिन के कपडे रख लेना बहु भी मुझ से तंग आ रही है माता के दर्शन हों जायेंगे और क्लेश में भी कुछ कमी आएगी बेटा चुचाप सब सुनता रहा जम्मू पहुँच कर बेटा माता से पूछने लगा माता क्या तुम चढाई कर सकोगी बेटा, है तो मुश्किल तो तुम यहीं रुको, पास के मंदिरों के दर्शन करो,भजन करो तुम्हारा यहीं इंतजाम करवा देता हूं माता को एक मंदिर में जहाँ बेसहारा लोगो के रहने की व्यवस्था थी छोड़कर बोला तुम यहीं रहो मैं कुछ दिनों में आकर ले जाऊंगा दिन बीतने लगे, हफ्ते बीत गए पर बेटा नहीं आया तब बुडिया ने वहां लोगो की मदद चाही जब उसने बताया की उसका बेटा वैष्णो देवी गया था पर मुझे लेने नहीं आया मेनेजर ने बताया की अब तुम्हारा बेटा नहीं आएगा वह तुम्हे यहाँ छोड़ गया है और तुम्हारे खर्च के लिए 1500 रूपये दे गया है और आगे से प्रति माह पैसे भेज देगा वह यह सुनकर सन रह गई अपने को सम्भाल कर माता ने कहा क्या आप मुझे 100 रूपए दे सकते हैं उन 100 रुपयों से वह अपने घर पहुंची और घर आकर उसने अपने ट्रंक में अपने पति द्वारा की वसिअत को निकाला और कोठी को बेच दिया बेटे बहु का सामान निकालकर बहार सड़क पर रख दिया बेटे बहु और बच्चों ने कहा नहीं माँ तुम हमारे पास ही रहो माता ने कहा नहीं तुम मेरे से छुटकारा चाहते थे मैं तुम्हे छुटकारा देती हूं मैं जा रही हूं न वापिस आने के लिए
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