9/18/2014

एक मुलाकात समाज के साथ

कल मुझे एक बुजुर्ग महाशय जर्जर अवस्था में मिले। बड़ी ही दयनीय हालत थी उनकी,किसी को भी उन्हें देखकर तरस आ जाये। पैर में जुते नहीं वस्त्र फटे हुए, शरीर की भी दुर्दशा लेकिन इन सबसे ऊपर उनके सर की पगड़ी। एकदम चमकती हुई सोने चांदी के तारो से दमकती रेशम की पगड़ी जिस पर रत्न आभूषण टंगे हुए।
   देखकर यकीं नहीं हुआ की ऐसे इंसान के पास इतनी महँगी पगड़ी?? अपनी जिज्ञासा के समाधान के लिए मेने उनसे पूछा:-बाबा आप कौन है और इस हालत में कैसे। आपके वस्त्र फटे हुए क्यों?आपने जुते क्यों नहीं पहने आपकी उम्र भी 100 के आस पास होगी फिर भी आप अकेले घूम रहे है।आपके वस्त्रो के पेबंद बताते है की आप बहुत गरीब है लेकिन आपके सर की पगड़ी कुछ और ही कहती है,मेरी सोच काम नहीं कर रही कृपया मुझे बताये आप कौन है? कहा से आये कहा रहते है।
बाबा बोले :- बेटी में गरीब नहीं हु बहुत ही समृद्ध हु,और तबसे हु जब से भारत है।"में समाज हु"। मुझे आश्चर्य हुआ
मेने पुछा :-आप किस जाती के समाज हो। सुनकर बाबा हँसने लगे
उन्होंने कहा:-जाती???? बेटी समाज जाती से नहीं होता जातिया समाज से होती हे ,पर तुम क्या जानो तुमने तो जन्म ही जाती व्यवस्था के बाद लिया।
आज समाज व्यवस्था के नाम से मनुष्य मनुष्य को बाँट चूका है। एक दुसरे को बड़ा बताने में इतनी खीचँतान हो रही हे की जीव योनि के सबसे समृद्ध जीव ने  मेरे कपडे भी फाड़ दिए।स्वयं को महान बताने के चक्कर मुझे ऐसी दयनीय अवस्था में ले आया और इसीलिए मेरी ये हालत है।
मेने पूछा:-पर बाबा आपकी ये पगड़ी????
बाबा बोले:-ये वो सफेदपोश लोग हे जिनके वस्त्र दिन के उजाले में तो सफेदी की चमकार से चमकते है पर रात के अंधेरो से ज्यादा उनके काले कारनामो ने उनकी आत्मा तक को मलिन और काली  बना दिया है।लोग उनकी सच्चाई को जानते हे फिर भी उन्हें सम्मान देते हे,सत्य के को पीछे कर उन जैसे लोगो को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करते है,सिर्फ पैसो के कारण इनका सम्मान करते उन्हें अपना सिरमौर बनाते है इसलिए मेरी पगड़ी इतनी महँगी है।
बाबा की सारगर्भित बातो ने मेरे ह्रदय को झकझोर दिया और सोचने पर विवश किया की क्या सचमुच हम मनुष्य है? सामाजिक प्राणी है?
कहलाने को तो हम समाज में जीते है नई पीढ़ी में संस्कारो का सृजन करते है,नए युग का निर्माण भी करते है,पर क्या सच में मनुष्यता है हम में????
पैसो ने हमारे बिच एक ऐसी दिवार बना दी जिसने भाई को भाई के खून का प्यासा कर दिया वृद्ध माता पिता को वृद्धाश्रम की राह दिखा दी ,पति पत्नी के विश्वास के रिश्तो में शक भर दिया,पिता पुत्र के रिश्तो में खटास पैदा कर दी।
आज जब परिवार की नीवं ही मजबूत नही रही तो समाज कैसे मजबूत होगा। अब वक़्त आ गया जब पैसो के मोह से दूर होकर हम सही इंसान की पहचान कर पाए,उन जीवन मूल्यों को समझ पाए जो पैसो से नही बल्कि आपसी संबंधो की मिठास से सम्यक जीवन दर्शन से आते है,सही मार्गदर्शन से आते है।
पहले ये कार्य धर्म गुरु करते थे। उनके यहाँ छोटे बडे अमीर गरीब का कोई भेद नहीं था। लेकिन आज ज्यादातर धर्मगुरु अपना पक्ष ऊँचा रखने के लिए सही गलत की जानकारी होते हुए भी गलत को आगे ला रहे है जो उनके बताये धर्म का प्रचार प्रसार करे। आज धर्म व्यवसाय बन चूका हे, टी वी पर अपना भाषण अखबारों में फोटो और सभी कार्यक्रमों को भव्यतम रूप देना चाहते है।
इसलिए समाज व्यवस्था लडखडा गई है,आडम्बर ने अपने पाँव पसार लिए हे।
अब वक़्त आ गया समाज व्यवस्था के पुर्ननिर्माण का,पुनः निरिक्षण का,समाज में व्याप्त बुराइयों से लड़ने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आने का।
तो कदम बढ़ाये और स्वस्थ समाज के योगदान में सहयोगी बने। काली आत्मा वाले सफेदपोश को समाज की अग्रिम पंक्ति से हटा समाज के सही व्यक्ति को सम्मान दे। तभी फिर से जर्ज्रावस्था में पहुचे समाज को सही मान सम्मान मिल पायेगा।
स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण हो पायेगा।

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