9/26/2014

गठबंधन

कल शिवसेना भाजपा का 25 वर्षो का रिश्ता टूट गया। कल ही एनसीपी और कोंग्रेस का 15 वर्षो पुराना रिश्ता भी टूट गया।
एक साथ दो बड़े गठबंधन खुल गए,और वर्षो से सहेजे रिश्तो में गांठ आ गई।
चुनाव से पहले हर बार ऐसा ही होता है,राजनितिक उठापठक के बाद रिश्ते बनते बिगड़ते है।
  25 वर्ष हो या 15 वर्ष कोई कम नहीं होते।इतने वर्षो बाद रिश्तो का टूटना आम इंसान पर कोई अच्छी छाप नहीं छोड़ता। आज का वोटर इन हालातो के बाद बड़ी दुविधा में है की उसे किसका साथ देना है। पार्टी के नाम पर वोट देने वाले अब अवश्य चिंतन करेंगे की कही जिन लोगो के खिलाफ आज पार्टी वाले बोले कल फिर गठबंधन तो नहीं कर लेंगे। या फिर चुनावी माहोल में गर्मी लाने के लिए इन गठबन्धनो को टुटा हुआ बताया हो,जबकि अन्दर से सब मिले हो।या फिर उसे वोट दे जो भले किसी बड़ी पार्टी का नेता न हो पर जमीन से जुडा कार्यकर्त्ता हो। सिर्फ वादों के पुलिंदो और दिखावटी अपनेपन से दूर आम इंसान की तकलीफों में सहयोगी हो।।।।
क्योकि जो वर्षो तक साथ रह कर एक दुसरे के नहीं हुए वो जनता के क्या होंगे।

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