अच्छी कंपनी का जॉब छोड़ कर घर बेठना आसान नहीं होता।पर में पिछले 6माह से घर ही हु क्योकि 6 माह पहले भगवान् में मुझे दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी से नवाजा और मेरे घर एक नन्ही कली को भेज दिया।मातृत्व के अहसास के साथ ही नोकरीपेशा हु ये तो भूल ही गई थी।
ससुरजी के खाने की समस्या के चलते सास गांव जाने लगी तो मुझे भी साथ चलने को कहा उन्हें लगता था की अभी मेरी बेटी को मेरे साथ सबकी जरुरत हे पर में नहीं जा पाई।
कल जब ऑफिस से फ़ोन आया तो मम्मीजी ने साफ मना कर दिया ऑफिस जाने के लिए, पर एक अच्छी बाई को रख कर मेने ऑफिस ज्वाइन कर ही लिया।
इतना आसान नहीं था बच्ची को खुद से दूर रखना पर बाई ने उसकी सारी जिम्मेदारी अपने सिर ले ली और में निश्चिन्त हो गई।
पता नहीं क्यों कुछ दिनों से गुड़िया में अजीब बदलाव आया वो रात को सोती ही नहीं एक तो ऑफिस की थकान और उस पर उसका रोना ,समझ में ही नहीं आता हो क्या रहा हे।बाई को बोल दिया इसे दिन में कम सुलाया करो रात को बहुत परेशान करती हे।
आज सुबह से तबियत ठीक नहीं थी पर ऑफिस में जरुरी मीटिंग थी तो सोचा मीटिंग अटेंड करके आ जाउंगी और दिन में बाई गुड़िया को रखेगी तो नींद भी पूरी कर लुंगी।
ट्रैफिक सिग्नल पर लाल बत्ती आते ही भिखारियो का झुण्ड गाडियो के आसपास आ गया ,बेचारे केसा जीवन जीते तीन चार माह के बच्चों को लेकर भीख मांगते है।
मेरी गाडी के आगे भी एक दयनीय युवती पांच छह माह के बच्चे के साथ आकर खड़ी हो गई,वेसे में ऐसे लोगो को कुछ देती नहीं पर पता नहीं क्यों उस औरत को 10 रूपये देने के लिए कांच निचे किया।
और उसे देखते ही सन्न रह गई उसके हाथो में मेरी फूल सी गुड़िया रानी थी।ऐसा लगा जेसे ये जमीं यही फट् जाए और में इसमें समा जाऊ,आज मम्मीजी की बात याद आ रही थी बेटे नोकरी की जिद में कही बच्ची का भविष्य न बिगड़ जाए,बच्चे कामवालियो के भरोसे नहीं बड़े होते।मुझसे कितनी बड़ी गलती हो गई।
उस औरत को अपने साथ गाडी में बिठाया और पति को मेसेज किया की जल्द से जल्द पुलिस को लेकर घर पहुचे।पुलिस को देख कर दोनों औरतो ने सच बोल दिया कितना घिनोना सच::::
जिस कंपनी से हमने कामवाली को रखा वहा पुलिस ने छापा मार कर मालिक को पकड़ लिया तब पता चला की नोकरीपेशा माँ बाप के बच्चों को भीख मांगने में इस्तेमाल किया जाता हे और बच्चे परेशान ना करे इसलिए उन्हें कफ सिरप पिला कर सुला दिया जाता है।
12/09/2014
ये केसी ख़ुशी
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