3/07/2020

शोषण रुके तब सार्थक होगा महिला दिवस


8 मार्च पूरा विश्व महिला दिवस मना रहा है।विभिन्न स्थानों पर महिला अपनी अस्मिता अपने सम्मान और अपने कार्यो को पूरे विश्व के समक्ष लाने का प्रयास कर रही है।
आज किसी भी क्षेत्र में नारी पीछे नही है।अपने ऊपर हुए अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए भी दिख जाएगी,अपने विचारों से विश्व में ज्ञानगंगा प्रवाहित करती हुई भी मिल जाएगी,परिवार के लिए समर्पित नारी है तो राष्ट्र में जागृति की अलख जगाते हुए भी नारी मिल जायेगी।बून्द बून्द से घट भरने की शक्ति रखने वाली दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती के रूप में तन मन और धन की शक्ति का रूप भी नारी है।
फिर क्यो नारी की सफलता के लिए मापदंड बन गए।क्यो हर बार उसे अपनी प्रतिभा को प्रूव करना पड़ता है।गार्गी मैत्रेयी हो या कल्पना चावला महादेवी वर्मा हो या सरोजिनी नायडू पी टी उषा हो गीता फोगाट हर क्षेत्र में नारी सफल ही है।फिर भी मानसिकता ये की ये महिला है तो क्या कर पायेगी,इतना समय निकाल पाएगी,काबिलियत तो है पर जिम्मेदारी दी जाए या नही।
कही ना कहीं इसकी जिम्मेदार भी महिला ही है।
एक वर्किंग वुमन घर का काम करके ऑफिस जाती है आकर भी काम करती है,चाहे मेड हो फिर भी बहुत से कार्य होते है जो उसे ही करने है।
घर मे रहने वाली वुमन जिसे सुबह बच्चो के स्कूल की तैयारी से लेकर रात को किचन पैक करने तक काम ही रहता है,जो पार्ट टाइम जॉब करती है घर से कोई कार्य करती है,या शॉप पर अपने पति का सहयोग करती है,उनके सभी कार्य परफेक्ट होते है।
आज परिवार समाज और राष्ट्र को महिलाओं से बहुत कुछ सीखना चाहिए।
कुशल प्रबन्धक :- महिलाएँ बचपन से ही कुशल प्रबन्धक होती है।अपनी हर चीज को व्यवस्थित रखती है।सब्जी के नमक से लेकर बिज़नेस की डील तक मे वो अपना 100% देती है। जैसे घर पर रहने वाली गृहिणी बचत के गुर के साथ घर मे अन्नपूर्णा बनती है वैसे ही ऑफिस में नए आइडियाज के साथ लक्ष्मी को संभालने में भी सक्षम होती है।
कहते है बड़े पत्थरो को तोड़ने के लिए डायनामाइट का उपयोग भी कर सकते है लेकिन छोटे छोटे पत्थर को तोड़ने में समय लगता है,वैसे ही पुरुष बड़े निवेश अच्छे से कर भी ले तो घर का बजट बनाना उनके लिए आसान नही होता लेकिन एक महिला ना सिर्फ व्यवस्थित बजट बनाती है वरन उसमे से बचाने की कला भी जानती है।
वैसे तो नारी गुणों का वो मीठे पानी का समंदर है जिसमे से परिवार समाज राष्ट्र कितना भी पानी निकाल समंदर भरा ही रहता है
संवेदनशील :- विज्ञान कहता है पुरुषों के मुकाबले नारी ज्यादा सवेंदनशील होती है उसे परिवार के सदस्यों की तकलीफ का अहसास भी जल्दी हो जाता है वैसे ही कार्यक्षेत्र में चल रही समस्या को भी वो जल्दी पकड़ने की क्षमता रखती है।
उसके इस गुण के कारण कई बार उसे कमजोर भी समझा जाता है लेकिन वही नारी वक्त आने पर मजबूत दीवार बन जाती है। हम अपने परिवार में भी देखते है कि खुद अस्वस्थ होते हुए भी नारी पूरे परिवार का ध्यान रख लेती है।
व्यवहार कुशल :- ये गुण हर इंसान में होना चाहिए लेकिन व्यवहार कुशलता में भी महिलाएं हमेशा आगे रही है।रिश्तों को निभाना परिवार के सदस्यों में संस्कारो का बीजारोपण करना और समय समय पर सभी को साथ लेकर उन्हें विकास की राह पर भेजना भी नारी का विलक्षण गुण है।
पुरूष प्रधान समाज ने हमेशा नारी को भोग की अपमान की वस्तु समझा है,अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन माना हैअपने अहंकार की पुष्टि का मार्ग।ओर हर बार नारी ने इन मान्यताओं को जुठलाते हुए विकास के नए इतिहास का सृजन किया।
आज भी नारी को भोग्या ओर सहज उपलब्ध वस्तु समझा जाता है।दहेज के केस कम हुए तो एसिड अटैक रेप के केस बढ़ गए चरित्रहीन बता कर तलाक के केस बढ़े हैं।पोर्न वीडियो बना कर ब्लैकमेल के केस बढे है।इस विकृत मानसिकता को खत्म करने की आवश्यकता है।
एक दिन महिला दिवस मना कर 364 दिन उनका अपमान करने की उन्हें भोग्या समझने की मानसिकता को बदलने की जरूरत है तभी महिला दिवस का सार्थक रूप सामने आएगा।
कानून महिलाओं के साथ किस रूप में है और वर्तमान में कोनसी सरकारी योजना महिलाओं के विकास के लिए है,इसकी जानकारी होना भी जरूरी है।
जैसे
कानूनी तौर पर महिला को अपने ऊपर होने वाले अत्याचार से बचने के लिए अनैतिक व्यपार एक्ट 1956, दहेज प्रथा रोकथाम एक्ट 1961, समान पारिश्रमिक एक्ट 1976, लिंग परीक्षण रोकथाम एक्ट 1994, मेडिकल टर्मनेशन ऑफ प्रग्नेंसी एक्ट 2006, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013 मुख्यत है।
इसके अलावा वर्तमान में जो सरकारी योजना जिनमे से मुख्यत है
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
महिला हेल्पलाइन योजम
उज्ज्वला योजना
सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड एम्प्लायमेंट प्रोग्राम फ़ॉर वुमन (स्टेप)
महिला शक्ति केंद्र
पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं का आरक्षण।
हो सकता है मेट्रो सिटी या बड़े शहरों में महिला सशक्तिकरण की गूंज उठती हो लेकिन आज भी भारत के गांवों में कई जगह  आज भी नारी बरसो से चली आ रही पंरपरा के नाम पर शोषित हो रही है।आवश्यकता है उनके भीतर के उत्साह को बढ़ाने का स्वयं के प्रति उनके विश्वास को जगाने का,उनके भीतर उम्मीद की लौ जलाने का।
तभी महिला दिवस सार्थक होगा ओर घर घर की नारी जागरूक बनेगी।

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