एक सवर्ण लड़की ने दलित के साथ शादी कर ली,ओर उसे अपने पिता से खतरा है।ये एक न्यूज को ब्रेकिंग न्यूज़ बना दिया गया।लेकिन यदि उसमे से सवर्ण ओर दलित शब्द निकाल दिए जाएं तो खतरा टल जाएगा।ऐसा लड़की को भी लगा और उसके सपोर्ट में मीडिया आ गई।वैसे भी क्रिकेट का बुखार उतर गया तो मीडिया बताए भी क्या।
अब इस घटना को दूसरे रूप से सोचते है जब लड़की होती है तो उसके जन्म के साथ ही माता पिता सपने देखना शुरू कर देते है।उसकी मुस्कराहट बनी रहे इसके लिए खुद के दर्द को कई बार मुस्कराहट के पीछे छिपा लेते है।जैसे जैसे बेटी बड़ी होती है माता पिता के सपने भी बड़े होने लगते है उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में बेटी की पढ़ाई उसकी शादी की बाते होना शुरू होती है और साथ ही शुरू होता है एक कुबेर के खजाने का निर्माण का कार्य बेटी के लिए ऐसा घर देखना जहाँ वो मायके से ज्यादा आराम से रहे ऐसे परिवार को ढूंढना जो उसे पीहर के परिवार के समान या उनसे ज्यादा प्यार करे,उसकी छोटी छोटी खुशियों की पूर्ति के लिए कन्या धन की व्यवस्था करना और खुद के पास धन नही है तो कहा से कितना उधार ला सकते है कैसे लड़के वालों की सब इच्छाओं को पूरा कर सके उस पर ध्यान केंद्रित हो जाता है।
ओर बेटियां भी बहुत प्यारी होती है उन्हें कोई भी चीज चाहिये तो मांग लेगी ना मिले तो जिद करेगी और उन्हें समझा दे कि कुछ समय बाद लाकर देंगे तो मान भी जाती है,क्योकि उसे विश्वास होता है चाहे एक बार मे या कुछ समय बाद उसके माता पिता उसकी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे।
लेकि यही बेटियां जब किसी से प्यार करने लगती है तो क्यो खुद से ही ये मान लेती है कि उसके प्यार को स्वीकार नही किया जाएगा।ये क्यो भूल जाती है कि जिद तो बचपन मे भी एक ही बार मे पुरी नही हुई तो इतनी बड़ी जिद ऐसे ही कैसे मान लेंगे।
ओर फिर उसी डर से भावुकता के क्षणों में एक गलत फैसला ले लेती है(मेरी नजरो में घर से भाग कर शादी करना सही फैसला हो ही नही सकता),ओर फिर बिना कहे घर छोड़ कर चली जाती है।बिना ये सोचे कि उनका भविष्य क्या होगा ।
ऐसी शादी के बाद नॉर्मली क्या होता है वो में आपको बताती हु।ओर ऐसा मेने कई घरों में देखा है जहाँ पर लड़कियों ने लव मैरिज की।ऐसे केस शादी के कुछ समय बाद ही प्यार के दम तोड़ते ही बन्धन लगने लगे जाते है और फिर कॉउंसिल के लिए आते है उन्ही का सार मेने शब्दो मे लिखने का प्रयास किया है।
मेने कई केस देखे है जहाँ लड़कियों ने ये भी नही देखा कि लड़का कुछ कमाई भी करता है या नही उसका पारिवारिक माहौल कैसा है,वो शादी करके रहेगी कहाँ।तब लड़की को ये लगता है प्यार से पेट भी भर जाएगा लेकिन ऐसा होता नही है।
अक्सर घर से भागी हुई लडकिया जब मिलती है तो वो अपने पेरेंट्स से बात भी नही करना चाहती है,कुछ केस में तो ये भी देखा गया है कि लड़की ने पेरेंट्स को पहचानने से भी इंकार कर दिया।
सोचने वाली बात ये है कि जिस लड़की के साथ उसके जन्म से पेरेंट्स गर्मी में छांव बन कर बरसात में छाता बन कर सर्दी में गर्म लिहाफ बन कर रहे वो कैसे उस बच्ची का बुरा सोचेंगे।यदि उस लड़की ने बचपन मे कोई वस्तु चुराई तो एक बार उसे समझाया होगा 2दूसरी बार गलती की तो उसे डांटा होगा और ना सुधरने पर कभी हाथ भी उठाया होगा क्योंकि वो उस लड़की की भलाई चाहते है।
एक लड़की जिसे 18 साल तक एक स्वप्न के रूप में बड़ा किया वो यदि गलत कदम उठाये तो क्या माता पिता का इतना भी हक़ नही की वो उसे डांट सके उसे समझा सके अपने दिल के दर्द को गुबार को निकाल कर बेटी को बता सके कि वो कहाँ गलत है।
लगभग 60% केसेज में लड़की की इस हरकत से माता पिता अपने ही दायरे में सिमट जाते है,खुद ही अपनी परवरिश पर सवाल उठाना शुरू कर देते है और मानसिक अवसाद के उन क्षणों में सहज ही हार्ट की कोई बीमारी पेरेलिसिस कोमा ट्रोमा ओर कई बार तो हार्ट फेल भी हो जाता है।
उनकी बीमारी को देख कर कई बार परिवार के सदस्य लड़की को बुलाते है कि एक बार आकर मिल लो शायद उसके आने से पेरेंट्स ठीक हो जाये और ये भी देखा गया है कि ऐसे समय मे भी लडकिया खुद की शर्तो पर आती है जैसे मुझे कोई कुछ नही कहेगा मेरे पति को सभी सम्मान देंगे ओर भी कई बातें।
परिवार वालो के पास कोई ऑप्शन नही होता क्योंकि उनके लिए पेरेंट्स ज्यादा जरूरी होते है।
लड़का कमाऊ है तो ठीक नही तो लड़की भी जॉब करती है वो बेटी जो पानी का गिलास भी आसानी से भर कर नही पीती अब घर का सारा काम करके जाब भी करती है।शादी के एक दो साल बाद जब प्यार का बुखार उतरता है तो खुद को ठगा हुआ महसूस करती है और फिर उसी बरगद की छांव में पहुँचती है जिसे पेरेंट्स कहते है।बेटी के आंसू जब बचपन में नही देखे गए तो अब कैसे देख सकते है।
ओर फिर बेटी की तकलीफों को दूर करने में माता पिता लग जाते है।कई बार तो बेटियां लिख कर भी देती है कि उन्हें माता पिता से कुछ नही चाहिए ना जमीन ना जायदाद प्यार भी नही।वही बेटिया कुछ समय बाद अपना हक लेने आ जाती है और अपने प्यार से पेरेंट्स को यकीन दिलाती है कि उनकी शादी उनके द्वारा लिया गलत फैसला था और पेरेंट्स जानते है कि ये झूठ बोल रही है फिर भी बेटी के मोह में उसकी हेल्प करते है।
जब बेटी भाग जाती है तो पेरेंट्स उनको सामने देख कर गुस्सा हो सकते है दुखी मन से यदि वो ये भी कह दे कि काश तू पैदा ही ना हुई होती या में तुझे मार देता तो वो उनकी मानसिकता स्थिर ना होने जे कारण निकले शब्द भी हो सकते है,ये बात भी लड़किया नही समझती ओर ऐसे वीडियो भेजती है जिसमे उन्हें अपने पेरेंट्स से जान का खतरा है।इसलिए कभी भी माता पिता को मनाने का प्रयास करे एक बार 2 बार नही जितनी बार करना पड़े करे आपका प्यार सच्चा है तो वो अवश्य ही मानेंगे क्योकि वो आपसे प्यार करते है।उनके विश्वास को घात करने से अच्छा उनके विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करे सफलता जरूर मिलेगी
कोई भी माता पिता अपनी बेटी की शादी बेरोजगार लड़के से नही करेगा उससे उम्र में बड़े लडके से भी नही करेंगे और यदि लड़का पहले से शादीशुदा है तो भी नही करेगा इसमें वो कही गलत भी नही है।अपनी बेटी के सुखद भविष्य की कामना करने वाले माता पिता के प्यार का कभी फायदा नही उठाना चाहिए उनके दुखी मन से निकले शब्द कभी व्यर्थ नही जाते।
आज के बच्चो को सोचना चाहिए कि माता पिता के प्यार के आंगन में बबुल का नही आम का पौधा लगाना चाहिए जिससे आने वाले समय मे आत्मसम्मान प्यार और विश्वास के फल उग सके।
नही तो शादी के कुछ समय बाद ही समझौते से भरा जीवन शुरू हो जाएगा,फिर या तो जैसे हालात है वैसे जिओ या फिर काउंसलर ओर कोर्ट के चक्कर लगाए
जीवन आपका है फैसला भी आपको ही करना है यो भी सोच समझ कर फैसला करे लव मैरिज करने से पहले खुद का भविष्य सिक्योर करे।ये भी देखे की लड़का अच्छी नोकरी करता हो उसकी पगार इतनी हो कि आपको खुश रख सके ऐसा नही की कॉलेज से निकले और शादी कर ली।लड़के का नेचर जरूर एक बार चेक कर ले कि कही फ्लर्टिंग उसकी आदत तो नही वरना कुछ समय बाद आपकी जगह कोई और ले लेगा।
7/14/2019
प्रेम विवाह:- सुखांत या समस्या का प्रारंभ
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