चार अंधे ओर हाथी
एक बार चार अंधे लोग कही जा रहे थे तभी वहां एक हाथी आता है।
चारो अँधे उस हाथी को पकड़ते है एक सूंड पकडता है एक पूँछ पकड़ता है बाकी 2 उनके पैर पकड़ते है।
अब चारो को पूछा हाथी कैसा होता है जिसने पूंछ पकड़ी उसे वो पतला लगा जिसने सूंड पकड़ी उसे वो नीचे से घुमावदार लगा बाकी 2 को खंबे के जैसा लगा।लेकिन जिसके आंखे थी उसके लिए हाथी की परिभाषा कुछ और थी।
ठीक इसी तरह हमारे जीवन मे भी हम उसे ही सही मानते जितना हमे समझ मे आता है,लेकिन सत्य उतना ही सीमित नही होता है।
हमे हमारे दृष्टिकोण को व्यापक करना होगा, ओर अंधो की तरह नही वरन आंख वालो की तरह हर परिस्थिति ओर संभावना को ध्यान में रखना चाहिए,ओर एक ही बात को पकड़ कर नही बैठना चाहिए बल्कि सिक्के के दूसरे पहलू को भी देखना चाहिए और समझना चाहिए।
हमारी सोच हमारे वर्तमान और भविष्य दोनो को नकारात्मकता की ओर भी ले जा सकती है और वही सोच व्यापक हो जाये तो सकारात्मक जीवन से अपने साथ सबके जीवन मे खुशियों को भर सकती है।
6/09/2019
चार अंधे ओर हाथी -हमारी सोच और हम
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें