2/27/2019

देश के प्रति क्या हो हमारी जिम्मेदारी।

अखंड भारत की ज्योत को जलाए हुए माँ भारती सदियों से अपने सीने पर कई घाव लिए हुए है।प्यार के प्रतीक लाल रंग से माँ भारती की चुनरी को वीरो ने अपने समर्पण और भक्ति से अपने खून से रंगा है,ओर ये रंग किसी दुकान पर या मॉल में नही वरन देश के प्रति जोश और जुनून से बनता है।
                  लेकिन अब देश की आबोहवा बदल रही है,कुछ ऐसा है जो हमारे समर्पण पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।कही ना कही हम स्वयं की सोच को सब पर थोपने की कोशिश करने में लग गए,अपने वैचारिक स्तर को तर्कणा शक्ति से मजबूत करने में लग गए।
       हमारे ऊपर सदियों से विदेशी ताकतों ने हमले किये, राज किया क्योकि हम एक नही थे फुट डालो ओर राज करो की कथाओं से भारत का इतिहास भरा पड़ा है।लेकिन हमने उससे क्या सिख ली ये एक बहुत बड़ा प्रश्न है।
                          जातिवाद के नाम से एकता खंडित न हो जाये:-तब भी हमे जातिवाद के नाम पर भड़काया जाता था,एक दूसरे की कमियों को उछालना सिखाया ओर आज भी कुछ लोग यही कर रहे है।देश की हवा में जातिवाद के जहर को घोल रहे,साम्प्रदायिक दंगे करवा रहे है।धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र जो हमारी संस्कृति और गौरव है उसको नष्ट करने का प्रयास अवांछित ताकते कर रही है।हमे हमारे ही अपनो के खिलाफ खड़ा कर रही है जिससे हम आपस मे ही लड़ते रहे मरते रहे,हमारे देश के युवाओं को गुमराह किया जा रहा है,उच्च शिक्षित युवा विदेशो में अपना भविष्य देख रहे है तो सामान्य युवा में कुछ को जातीय भक्ति के नाम पर देश की व्यवस्था को भंग करना सिखाया जा रहा है।
     सरकारी कार्यकर्ता किसी पार्टी का नही होता:-जब भी किसी सरकारी तंत्र में कोई घोटाला होता है कोई अधिकारी रिश्वत लेते या गलत कार्य करते पकड़ा जाता है तो हम ये नही कहते कि अमुक पार्टी का सरकारी कार्यकर्ता पकड़ा गया,वरन उस सरकारी तंत्र का नाम लेते है जिसमे वो कार्य करता है जैसे नगरपालिका, पुलिस, शिक्षा विभाग टेक्स विभाग यहाँ तक कि सेना भी।
इसका सीधा अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति सरकारी विभाग से वेतन प्राप्त कर रहा है तो वो उच्च अधिकारी हो या क्लर्क वो किसी पार्टी को नही देश की सरकार ओर सरकारी कार्यालय का प्रतिनिधित्व करते है।लेकिन कुछ लोगो को या तो इसकी जानकारी नही है या उन्हें गुमराह किया जाता है इसलिए वो कुछ सरकारी कार्यालयों को पार्टी विशेष से जोड़ देते है।सरकारी कार्यालय पार्टी विशेष से नही वरन देश की जनता द्वारा भरे जा रहे टेक्स से चलते है।इसलिए वो सरकारी तंत्र और वहाँ कार्य करने वाले लोग सभी पार्टी के लिए समान होते है।हर सरकारी तंत्र में कुछ बेईमान लोग हो सकते है तो ईमानदार लोगो की भी कमी नही होती,ये हम अपने विवेक से निश्चित करे की कोंन अधिकारी कैसा है।
                    कुछ राजनेता सीधे है:-ये भी एक भ्रम है कि राजनीति सीधे लोग भी कर सकते है।हम स्वयं आकलन कर की हम जहाँ रहते है वहाँ के वार्ड के चुनाव में भी हम उस व्यक्ति को वोट देते है जिसका वार्ड में रौब हो,जिससे वो वार्ड के विकास के लिए हिम्मत के साथ कार्य कर सके ओर उसके रौब ओर व्यक्तित्व को देख कर कोई भी कार्य समय से पूर्ण हो जाये। जिस समाज व्यवस्था का हिस्सा हम है वहाँ भी हम ऐसा अध्यक्ष चुनते है जो तन मन धन से समर्पित कार्यकर्ता हो और जिसकी एक पहचान हो जिसके कारण कभी भी किसी कार्य मे रुकावट ना आये।
तो हम इस भ्रम में ना रहे कि कोई नेता सीधा है या भोला है, या आम नागरिक की तरह है,बल्कि हम अपने विचारों के तराजू में उस व्यक्तित्व को तोले ओर स्वयं निर्णय करे।और ये कहे कि ये राजनेता इन मानक मूल्यों पर इतना खरा उतरता है।
                       अभिव्यक्ति की आजादी को निम्न स्तर पर ना ले जाये:-आप किसी के विचारों से सहमत हो या ना हो कोई आपके विचारों से सहमत हो या न हो, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी सबको है।जब हम किसी व्यक्ति को सामने से देखते है तो उसके दो कान दिखाई देते है लेकिन जब उसे दांये या बांये से देखते है तो एक ही कान दिखाई देता है, इसका मतलब ये नही की दोनों में से कोई एक गलत है।ये दोनों के खड़े रहने की जगह पर निर्भर है कि वो क्या देख रहे है।इसी तरह आपके विचार या आपकी किसी के प्रति निष्ठा आप अपनी जगह से देखते है लेकिन दूसरे भी वही खड़े होकर देखे जरूरी नही।ऐसे समय मे हम जो बोलते है या लिखते है वो हमारी वैचारिक सोच को दर्शाता है हमारी परिपक्वता को लक्षित करता है इसलिए वैचारिक सोच के घनी बनिये ओर शब्दो के स्तर से स्वयं को नीचे गिराने से बचिए। आप अपनी अभिव्यक्ति बिना भाषा के स्तर को गिराए भी कर सकते है।
                   मतभेद को मनभेद में ना बदले:- कई बार हम जिन्हें अपना मानते है उसके प्रति कुछ गलत सुनना पसंद नही करते यही से मतभेद शुरू होते है,मतभेद हो तो कोई तकलीफ नही लेकिन जब ये मतभेद मनभेद में परिवर्तित हो तो आपसी रिश्ते बिगड़ने शुरू हो जाते है,ओर अनायास ही हम उस व्यक्ति के प्रति एक मोर्चा खोल लेते है जो हमारे ही परिवार का हिस्सा है।जिससे आपसी रिश्तों में टकराव की स्तिथि उतपन्न होने लग जाती है और हम रिश्तो के मूल्यांकन करने प्रारम्भ कर देते है।ऐसी स्तिथि से बचना चाहिए।आपस मे साथ मिलकर ही देश के सकारात्मक विकास में अपना योगदान दे सकते है।मनोभेद के कारण ही विदेशी ताकते कुछ लोगो को गद्दार बनाने में लग जाती है।इसलिए हमारे अपनो का हम सम्मान करना सीखें।
                     सोशल मीडिया की पोस्ट को शेयर करने से पहले सोचे:-आज हम सब पर यदि सबसे ज्यादा कोई हावी है तो वो है सोशल मीडिया।कुछ अवांछित तत्व यहां बहुत ज्यादा सक्रिय है और विभिन्न प्रसिद्ध नाम से ये पोस्ट करते है।ओर इनकी पोस्ट फोटोशॉप से मिक्स करके बनाई हुई भी हो सकती है,वीडियो में भी डबिंग आवाज हो सकती है।लेकिन कई बार बिना सोचे समझे भावनाओं में बह कर हम ऐसी पोस्ट को शेयर करके उसकी वेल्यू बढ़ाने में लग जाते है।जिसका सीधा खामियाजा देश को भुगतना पड़ता है।इसलिये कोई भी पोस्ट आप पड़ते है तो जरूरी नही की उसे शेयर भी करनी ही है।और ऐसा भी नही है कि आपको वो गयं सबसे पहले अपने दोस्तों को देना ही है।उस पोस्ट पर पहले चिंतन करे यदि वीडियो है तो पोस्ट करने वाले को बोले कि पूरा वीडियो पोस्ट करे, क्योकि आप द्वारा शेयर किया अधूरे ज्ञान  की भरपाई कई बार सेना को भी करनी पड़ सकती है,किसी निर्दोष को भी करनी पड़ सकती है।इसलिए पहले संबंधित घटना की पूरी जानकारी प्राप्त कर ले।। 
         ये देश हमारा है और हम इस देश के है।इसलिए हमारे कार्यो से देश के गौरव में वृद्धि हो,देश का विकास हो,ओर वृहद गणतांत्रिक देश के रूप में भारत विश्व मे सबसे अग्रिम में खड़ा हो इसलिये अपना सहयोग से देश को गति प्रदान करनर में करे,ना कि केकड़े बन कर एक दूसरे की टांग खींच कर विकास में बाधक बन।

*ये आकेख किसी भी राजनीतिक पार्टी को सपोर्ट नही करता।ये सिर्फ जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

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